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Friday, 12 July 2013

नयी उम्मीद


जख्मी हुए थे कई ह्रदय
भर गए अब घाव सारे
क्यों रिसता है खून
बहती है मवाद की धारा ?
रिश्तों की मरहम से
पट गए सबके मन
आंसू सिर्फ एक जीवन में
आज भी वो हृदय
चीखता है बिलखता है
कहाँ फर्क पड़ता है जहाँ में?

हे सूरज! ये कैसा न्याय है
सबको मिलती रौशनी एक सी
फिर भी क्यों दिखता अँधेरा सा

उठो ना .. पोंछ लो आँसू
महसूस कर के तो देखो
सूर्य अन्यायी नहीं
काला चश्मा पहना हमने ही
हटा पाएंगे जिस दिन ये पर्दा
खिलखिलाती धुप से नहा ही लेंगे !


~१२/०७/२०१३~ 

Wednesday, 29 May 2013

बारिश


वाह! क्या खूब है ये बारिश
कभी हँसाती कभी रुलाती
दिल में अनजान चेहरा सी
खुशबु उड़ाती मन को बहलाती
ये बारिश..

ममतामई आँखों में डबडबाती सी 
जवान पलकों पे मुस्काती सी
अनजान ख्यालों से सेहराती
एक अहसास सी
ये बारिश..

चंचल क़दमों में फुदकती
उन्मुक्त बेखयाली हंसी सी
प्रफुलित करती तन मन
फिर, दिल को गुदगुदाती
ये बारिश..

इन्द्रधनुषी सपने सजाती
फूल-पत्ती, खेत-खलयान में
मोती सी चमकती
सोई धरती को जगाती
ये बारिश..

यही तो है, जिंदगी,
जीने की चाह बढाती
मासूम अधरों पे खिलखिलाती
हर मन बस-बस जाती
ये बारिश..!!!


~29/05/2013~

Monday, 6 May 2013

राह


तप रही है मरुभूमि
अगन लगी है हर ओर
ऐ रंगरेज तू ही बता
इस का सरल हल कोई..

युद्ध है यहाँ और वहाँ भी
कमज़ोर है हर इंसान
फिर भी समझे बलवान
हर दुसरे से..

प्यासा हूँ एक बूँद पानी का
खून से रंगी हर नदी है
अरे नहीं !! वो सामने तो
मिठास बह रही है  ..

ये किसका अक्स है पानी में
ये में तो नहीं हूँ
ये लाल छींटे मुख पे मेरे भी
हाथ जख्मी , जलते हैं..

में तो बच कर रहा कितना
खुनी हुआ फिर मेरा क्यों दामन
क्या सच का अर्थ बदल गया
भूल गया में भी क्या.. सच??

ऐ रंगरेज.. तू ही बता
कैसे करूँ साफ़ ये दामन
बदरंग चेहरे पे फिर
ला सकूँ इन्द्रधनुष ??

~~06/05/2013~~

Friday, 12 April 2013

प्रेम... विश्वास


सुनो...

“हम्म............”

क्या जानती हो
इस आदमखोर जंगल के परे
एक शीतल झरना बहता है...

“हाँ...
पता है मुझे .....”

कैसे पता है
कभी गयी हो उस ओर
जो कहती हो पता है ??

“नहीं..
लेकिन जाना चहाती हूँ..”

सोच लो
जंगल पार करना पड़ेगा
रास्ता कठिन है...

“अच्छा...
साथ हो तुम तो क्या चिंता ..”

मुझपर
इतना विश्वास कैसे करती हो
घबराहट नहीं होती..

“नहीं..
प्रेम करती हूँ तुमसे...”

~~१२/०४/२०१३~~

Friday, 15 March 2013

Just when...


Just when it was
Drenched  and Messy
Happy Rainbow
Gave Life ..

Just when it was
Dark and Scary
Bright sun
Brought Sunshine ..

Just when it was
Slippery and Slimy
Strong bonds
Gave Strength ..

Just when it was
Freaky and Gloomy
Unbounded love
Brought Life .

#13/03/2013

Wednesday, 13 March 2013

Soul


I know - A Me inside me
is a part I own 
and it's only a part
for long I have known

there are deep valleys
bleeding in my heart
there are vast uncharted
wastelands in my mind

unaccounted dreams 
disturbs me
mesmerizing thoughts
captivates inside

somewhere deep recesses
vaccums out
everywhere forbidden pastures
succumbs

whirlpool of tweeds
encirlces the soul
whispering sounds
blast inside

have to explore and search
the rest of me , to
get hold of my
possessed soul.



~~23/10/2012~~