Can full of words spills frothing from it splashing on the blank paper weaving meaningful images.
Monday, 25 July 2016
Friday, 22 July 2016
हमदम मेरे
एहसास तेरा बन के बूँद ठहरा
मेरी आँखों के मंज़र में
दर्द मेरा बन के आँसू तेरा
बरसा बिन मौसम बारिश जैसे
प्यार तेरा मन में बसा
भीगा गया तन मन मेरा
हमदम मेरे ,नयनो में तेरे
सपने मेरे ,तैरते हैं
बाँहों में तेरी , जन्नत मेरी
ज़िन्दगी जीती है
हर साँस में मेरी
तेरी मौजुदगी है
~ ०७/०४/२०१६~
©Copyright Deeप्ती
मेरी आँखों के मंज़र में
दर्द मेरा बन के आँसू तेरा
बरसा बिन मौसम बारिश जैसे
प्यार तेरा मन में बसा
भीगा गया तन मन मेरा
हमदम मेरे ,नयनो में तेरे
सपने मेरे ,तैरते हैं
बाँहों में तेरी , जन्नत मेरी
ज़िन्दगी जीती है
हर साँस में मेरी
तेरी मौजुदगी है
~ ०७/०४/२०१६~
©Copyright Deeप्ती
Monday, 18 July 2016
काश
काश होता मेरे पास
एक मजबूत काँधा ऐसा....
जिस पर रख कर सर
कर लेती हर गम हल्का
जिसकी बाहों में पाती
ज़माने भर की खुशियां
गहरी रात में जब डर जाती
पापा पापा कह लिपट जाती
जिसकी गोद में रख कर सर
मीठी लोरी सुनती जाती
काश होता मेरे पास
एक मजबूत काँधा ऐसा....
जिस पर
हर सुबह
टंगता,
मेरा बैग
जिसके पीछे चलती अल्हड़ सी मस्त
जिसकी ऊँगली पकड़ पहुँचती
स्कूल , गर्व से सीना तान के
जिसके होने भर से कभी ना पाती
माँ की आँखों में बहता समुन्दर
जिसकी बाहों में पाती
प्यार में अपने लिए
काश होता मेरे पास
एक मजबूत काँधा ऐसा....
आगे बढ़ने से जब डरती
कहता "डर मत। . में हूँ न"
तब गिरने का ना होता डर
थाम जो लेता हर मोड़ पर
जिसकी आँखे बुनती सपने
मेरे उज्जवल भविष्य के
जिसकी नसीहतें देती सीख
ज़माने से लड़ने की
काश होता मेरे पास
एक मजबूत काँधा ऐसा....
जो करता माफ़ हर गलती मेरी
फिर देता इक मीठी सी झिड़की
मेरी उपलब्धियों पर
प्रेम से भर देता मेरी झोली
जब पिया के घर में जाती
दुआ से भर देता मेरी झोली
हर जीत पे मेरी
होता सीना चौड़ा जिसका
Monday, 11 July 2016
काश तुम लौट आते
सुरीले वे अलफ़ाज़ कोई गीत न रच पाय
पन्नो पे भिखरी स्याही धूमिल सी हो गई
आँधियों ने ना जाने कितने बसेरे उजाड़े
लहरों के कितने थपेड़े चट्टानों ने सहे
सब खामोश चीत्कार करते रहे
बेजान सूखी सी लहरों से
काश तुम लौट के आ पाते
जहाँ से कभी कोई सन्देश ना आते
खामोश गलियारों में ना जाने
कहाँ गुम हो गए
एक झलक को भी हम तरसे जाते
काश तुम वहां से लौट के आ पाते
~ १२/०७/२०१६ ~
©Copyright Deeप्ती
Friday, 8 July 2016
Thursday, 7 July 2016
Friday, 3 June 2016
वो..... !!
हवा में लहराता तेरा वो रेशमी दुपटटा
अनजाने ही छू गया था मेरा चेहरा
महक उठा मेरा अंतर्मन
दौड़ पड़ी गुदगुदाती सी सिरहन
घुमड़ आये बादल जम के बरसे
सर से पैर तक भिगोए रखें
प्रेम की मासूम बूँदों से
सरसराती नीम की डाली
झूला रही थी उन घरोंदों को
नन्हे पंछी सो गए सुन के तेरी लोरी
लहराते झूमते नाचते पेड़ मन मयूर को रिझा रहे थे
उस दिन जब देखा था तुझको खिड़की से झांकते हुए
सुरमई आँखों में सतरंगी इंद्रधनुष चमके थे
अधरों पे बिखेरे मासूम मुस्कान
~ ०१/०६/२०१६ ~
©Copyright Deeप्ती
अनजाने ही छू गया था मेरा चेहरा
महक उठा मेरा अंतर्मन
दौड़ पड़ी गुदगुदाती सी सिरहन
घुमड़ आये बादल जम के बरसे
सर से पैर तक भिगोए रखें
प्रेम की मासूम बूँदों से
सरसराती नीम की डाली
झूला रही थी उन घरोंदों को
नन्हे पंछी सो गए सुन के तेरी लोरी
लहराते झूमते नाचते पेड़ मन मयूर को रिझा रहे थे
उस दिन जब देखा था तुझको खिड़की से झांकते हुए
सुरमई आँखों में सतरंगी इंद्रधनुष चमके थे
अधरों पे बिखेरे मासूम मुस्कान
~ ०१/०६/२०१६ ~
©Copyright Deeप्ती
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