Can full of words spills frothing from it splashing on the blank paper weaving meaningful images.
Thursday, 6 June 2013
Wednesday, 29 May 2013
बारिश
वाह! क्या खूब है ये
बारिश
कभी हँसाती कभी
रुलाती
दिल में अनजान चेहरा
सी
खुशबु उड़ाती मन को
बहलाती
ये बारिश..
ममतामई आँखों में डबडबाती सी
जवान पलकों पे मुस्काती सी
अनजान ख्यालों से सेहराती
एक अहसास सी
ये बारिश..
चंचल क़दमों में फुदकती
उन्मुक्त बेखयाली हंसी सी
प्रफुलित करती तन मन
फिर, दिल को गुदगुदाती
ये बारिश..
इन्द्रधनुषी सपने सजाती
फूल-पत्ती, खेत-खलयान में
मोती सी चमकती
सोई धरती को जगाती
ये बारिश..
यही तो है, जिंदगी,
जीने की चाह बढाती
मासूम अधरों पे खिलखिलाती
हर मन बस-बस जाती
ये बारिश..!!!
~29/05/2013~
Monday, 6 May 2013
राह
तप रही है मरुभूमि
अगन लगी है हर ओर
ऐ रंगरेज तू ही बता
इस का सरल हल कोई..
युद्ध है यहाँ और वहाँ भी
कमज़ोर है हर इंसान
फिर भी समझे बलवान
हर दुसरे से..
प्यासा हूँ एक बूँद पानी का
खून से रंगी हर नदी है
अरे नहीं !! वो सामने तो
मिठास बह रही है ..
ये किसका अक्स है पानी में
ये में तो नहीं हूँ
ये लाल छींटे मुख पे मेरे भी
हाथ जख्मी , जलते हैं..
में तो बच कर रहा कितना
खुनी हुआ फिर मेरा क्यों दामन
क्या सच का अर्थ बदल गया
भूल गया में भी क्या.. सच??
ऐ रंगरेज.. तू ही बता
कैसे करूँ साफ़ ये दामन
बदरंग चेहरे पे फिर
ला सकूँ इन्द्रधनुष ??
~~06/05/2013~~
Friday, 12 April 2013
प्रेम... विश्वास
सुनो...
“हम्म............”
क्या जानती हो
इस आदमखोर जंगल के परे
एक शीतल झरना बहता है...
“हाँ...
पता है मुझे .....”
कैसे पता है
कभी गयी हो उस ओर
जो कहती हो पता है ??
“नहीं..
लेकिन जाना चहाती हूँ..”
सोच लो
जंगल पार करना पड़ेगा
रास्ता कठिन है...
“अच्छा...
साथ हो तुम तो क्या चिंता ..”
मुझपर
इतना विश्वास कैसे करती हो
घबराहट नहीं होती..
“नहीं..
प्रेम करती हूँ तुमसे...”
~~१२/०४/२०१३~~
Friday, 15 March 2013
Wednesday, 13 March 2013
Soul
I know - A Me inside me
is a part I own
and it's only a part
for long I have known
there are deep valleys
bleeding in my heart
there are vast uncharted
wastelands in my mind
unaccounted dreams
disturbs me
mesmerizing thoughts
captivates inside
somewhere deep recesses
vaccums out
everywhere forbidden pastures
succumbs
whirlpool of tweeds
encirlces the soul
whispering sounds
blast inside
have to explore and search
the rest of me , to
get hold of my
possessed soul.
~~23/10/2012~~
Friday, 9 November 2012
मुसाफिर
चल ले ऐ! मुसाफिर
तू चाहे किन्ही काफिलों में
ये जान ले आज तू
सफर तो करना है तय अकेले..
फिर चाहे साथ का जूनून हो
या हो जुदाई का गम
मंजिल तो तेरी अपनी है
समेट ले अपने आप में ..
चल अकेला चल अकेला
मौज में अपनी
गुनगुनाते हुए
मंगल मंज़िल गीत...
~०८/११/२०१२~
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